सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय Sumitranandan Pant's life introduction . जीवन परिचय ---- सुमित्रानंदन पंत का जन्म अल्मोड़ा जिले के कौसानी ग्राम में 14 मई 1900 में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित गंगा दत्त पंथ था। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्रारंभ की तथा इन्होंने अल्मोड़ा ,काशी, और प्रयाग में भी शिक्षा प्राप्त की। Life Introduction ---- Sumitranandan Pant was born on 14 May 1900 in Kausani village of Almora district. His father's name was Pandit Ganga Dutt Panth. He started his primary education in the village itself and he also got education in Almora, Kashi and Prayag. सुमित्रानंदन पंत बंगला ,अंग्रेजी ,एवं संस्कृत के अच्छे ज्ञाता थे। इनकी रचनाओं पर स्वामी रामतीर्थ, विवेकानंद, रविंद्र नाथ ठाकुर, अरविंद आदि महापुरुषों के जीवन दर्शन की गहरी छाप पड़ी है। यह बचपन से ही प्रकृति के सुरम्य अंचल में रहने के कारण इनमें प्रकृति के प्रति अटूट आकर्षण है। सुमित्रानंदन पंत अत्यंत ही सुंदर,भावुक एवं सरल हॄदय के व्यक्ति थे। Sumitranandan Pant was a great knowledgeer of Beng...
सूरदास (Surdas) **सूरदास का जीवन परिचय** हिंदी साहित्य के सूर्य माने जाने वाले तथा कृष्ण भक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित राम दास सारस्वत तथा आगरा के निकट रुनकता गांव में जन्मे सूरदास वात्सल्य के क्षेत्र में विश्व साहित्य में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि सूरदास जी जन्म से अंधे थे। कुछ का यह मानना है कि वे जन्म से अंधे नहीं थे, वे कहते हैं कि प्रकृति का बाल मनोविकृतिओं का और मानव स्वभाव का जैसा सुंदर संजीव सूक्ष्म एवं मनोहारी वर्णन सूरदास ने किया है। वैसा कोई जन्मांध व्यक्ति कभी नहीं कर सकता संत कबीर दास को बचपन से ही पद एवं काव्य लिखने का बहुत ही शौक थाएक बार यह गाय को चराते हुए हुए पद की व्याख्या कर रहे थे तभी वहां आ रहे वल्लभाचार्य ने उनके पद को सुना और महाप्रभु वल्लभाचार्य ने भक्त सूरदास को गोवर्धन पर्वत पर स्थित शिव मंदिर में अपने आराध्य श्री नाथ की सेवा में कीर्तन करने के लिए नियुक्त किया और कुछ समय तक संत सूरदास जी ने गोवर्धन पर्वत पर ही कीर्तन किया अपने 105 वर्ष सुदीर्घ जीवन काल में सवा ल...
रामवृक्ष बेनीपुरी (Ramvriksh benipuri) रामवृक्ष बेनीपुरी का जीवन परिचय रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 1902 में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम कुलवंत सिंह था। वह एक साधारण किसान थे। बचपन में ही माता पिता की मृत्यु हो जाने से मौसी ने इनका लालन-पालन किया। वर्ष 1920 ईस्व में इन्होंने अध्ययन छोड़ दिया और गांधी जी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। इन्होंने स्वाध्याय के बल पर ही हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से 'विशारद' परीक्षा उत्तीर्ण की। देश सेवा करते हुए अनेक वर्षों तक जेल की यात्राएं सहनी पड़ी । वर्ष 1968 ईस्वी में इनका स्वर्गवास हो गया था साहित्य योगदान ----- बेनीपुरी जी के क्रांतिकारी व्यक्तित्व में उच्च देशभक्त, मौलिक साहित्यिक प्रतिभा और अथक समाज सेवा की भावना का अद्भुत समन्वय था। कृतियां -----इनमें साहित्य की ओर रुचि रामचरित्रमानस के अध्ययन से जागृत हुई। उन्होंने अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। बालक, तरुण ,भारतीय युवक, किसान मित्र ,कैदी ,योगी ,जनता ,हिमालय, नई धारा ,चुन्नू मुन्नू आदि । रामवृक्ष बेनीपुरी जी ...