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आसियान क्या है ? इसका उद्देश्य क्या है ? भारत किस प्रकार आसियान से संबंधित है

आसियान क्या है ? इसका उद्देश्य क्या है? भारत किस प्रकार आसियान से संबंधित है। एशिया और तीसरी दुनिया के देशों में एकता बनाए रखने के प्रयास के कारगर नहीं होने के कारण एशियाई देशों ने दक्षिण पूर्वी एशियाई संगठन आसियान बनाकर एक वैकल्पिक कहा लिखिए 1967 में 5 एशियाई देश ने बैंकॉक घोषणा पर हस्ताक्षर कर आसियान की स्थापना की इंडोनेशिया मलेशिया फिलीपींस सिंगापुर एवं थाईलैंड इसके संस्थापक देश है आसियान के निम्नलिखित तीन मुख्य स्तंभ है। 1. आसियान सुरक्षा समुदाय -- यह आसियान देशों के मध्य विवाद को खत्म कराने और सैनिक टकराव तक नया जाने की सहमति पर आधारित है।  2.    आसियान आर्थिक समुदाय --- इसका उद्देश्य आसियान देशों को साझा बाजार और उत्पादन आधार तैयार करना तथा इस इलाके में सामाजिक और आर्थिक विकास में सहायता करना है। 3. आसियान सामाजिक सांस्कृतिक समुदाय --- इसका औचित्य आसियान देशों के बीच सामाजिक व सांस्कृतिक मेल मिलाप की स्थापना करना है। इसके अलावा आसान समुदाय के निम्नलिखित उद्देश्य है -- आसियान का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास कोचिंग करना और इसके द्वारा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास प्र...

महाकवि भूषण का जीवन परिचय . Biography of Mahakavi Bhushan।।Articles ।। in English and Hindi..

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  महाकवि भूषण  Mahakavi Bhushan महाकवि भूषण जीवन परिचय Biography of Mahakavi Bhushan वीर रस के सर्वश्रेष्ठ  महाकवि भूषण   का जन्म 1613 ईसवी में कानपुर (उत्तर प्रदेश )के त्रिविक्रमपुर (तिकवापुर) गांव में हुआ था।इनके पिता का नाम पंडित रत्नाकर त्रिपाठी था।  हिंदी के प्रसिद्ध कवि चिंतामणि त्रिपाठी और मतिराम इनके भाई थे। इनके वास्तविक नाम के विषय में अभी तक ठीक से पता नहीं चल पाया है। Bhushan, the best Mahakavi of Veer Ras, was born in 1613 AD in Trivikrampur (Tikavapur) village in Kanpur (Uttar Pradesh). His father's name was Pandit Ratnakar Tripathi. Famous Hindi poets Chintamani Tripathi and Matiram were his brothers. The subject of his real name has not been properly known yet. चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्रदेव ने इनकी काव्य प्रतिभा से प्रभावित होकर इन्हें कवि भूषण की उपाधि से अलंकृत किया था। तभी से यह भूषण के नाम से प्रसिद्ध हो गए। अनेक राजाओं के आश्रय में रहने वाले कवि भूषण को मनोनुकूल आश्चर्यदाता दो ही मिले--छत्रपति महाराजा शिवाजी और वीर केसरी बुंदेला राजा छत्र...

सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय. Sumitranandan Pant's life introduction

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  सुमित्रानंदन पंत का जीवन परिचय Sumitranandan Pant's life introduction . जीवन परिचय ---- सुमित्रानंदन पंत का जन्म अल्मोड़ा जिले के कौसानी ग्राम में 14 मई 1900 में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित गंगा दत्त पंथ था। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्रारंभ की तथा इन्होंने अल्मोड़ा ,काशी, और प्रयाग में भी शिक्षा प्राप्त की। Life Introduction ---- Sumitranandan Pant was born on 14 May 1900 in Kausani village of Almora district. His father's name was Pandit Ganga Dutt Panth. He started his primary education in the village itself and he also got education in Almora, Kashi and Prayag. सुमित्रानंदन पंत बंगला ,अंग्रेजी ,एवं संस्कृत के अच्छे ज्ञाता थे। इनकी रचनाओं पर स्वामी रामतीर्थ, विवेकानंद, रविंद्र नाथ ठाकुर, अरविंद आदि महापुरुषों के जीवन दर्शन की गहरी छाप पड़ी है। यह बचपन से ही प्रकृति के सुरम्य अंचल में रहने के कारण इनमें प्रकृति के  प्रति अटूट आकर्षण है। सुमित्रानंदन पंत अत्यंत ही सुंदर,भावुक एवं सरल हॄदय के व्यक्ति थे। Sumitranandan Pant was a great knowledgeer of Beng...

**कविवर बिहारी का जीवन परिचय**

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  कविवर बिहारी **कविवर बिहारी का जीवन परिचय** कविवर बिहारी का जन्म 1603 ईसवी में ग्वालियर राज्य के बसुआ गोविंदपुर नामक गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम केशव राय था, जिन्हें मथुरा का चौबे ब्राह्मण माना जाता था।बिहारी ने निंबार्क संप्रदाय के अनुयाई स्वामी नरहरिदास से संस्कृत प्राकृत आदि भाषाओं का अध्ययन किया था। महाराज जयपुर नरेश के दरबारी कवि बिहारी ने एक-एक दोहे में अनेक भावों को  इतनी सरलता पूर्वक भर दिया कि इन्हें गागर में सागर भरने वाला महाकवि माना जाने लगा। " सतसैया के दोहरे, ज्यो नावक के तीर।  देखन में छोटे लगै, घाव करे गंभीर।।" सन 1663 ईसवी में इनका स्वर्गवास हो गया था। कृतियां ----- कविवर बिहारी ने 700 से कुछ अधिक दोहे की रचना की है जिनका संग्रह बिहारी सतसई के नाम से जाना जाता है। अलंकार, नायिका भेद, प्रकृति वर्णन ,भाव विभाव, अनुभाव, संचारी भाव आदि सभी का समावेश कुल 48 मात्राओं के एक छोटे से छंद दोहे में भर कर इन्होंने काव्य कला का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया है। एकमात्र ग्रंथ 'बिहारी सतसई' लिखकर इन्हें जो प्रसिद्धि मिली वह किसी भी कवि के लिए बहुत बड़ा सम्मा...

गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय

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  गोस्वामी तुलसीदास (Goswami Tulsidas) **गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय** **तुलसीदास का जन्म 1532 ईसा पूर्व में राजापुर (बांदा जिला) के सरयूपारीण ब्राह्मण कुल में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे था। तथा उनकी माता का नाम हुलसी देवी था। बचपन के कुछ दिनों बाद ही इनकी माता की मृत्यु हो जाती है। और इनके पिता इनके अद्भुत नेत्र होने के कारण इनका त्याग कर देते हैं। इसी दशा में इनकी भेंट रामानंदी संप्रदाय के साधु नरहरिदास से होती है साधु नरहरिदास इन्हें अपने साथ ले जाते हैं तथा भिन्न-भिन्न तीर्थों का भ्रमण कराते हैं कुछ समय के पश्चात तुलसीदास स्वामी जी के साथ काशी आ जाते हैं। जहां परम विद्वान महात्मा से सनातन जी ने इन्हें वेद ,वेदांत, दर्शन इतिहास पुराण आदि में निष्णात किया था। तुलसीदास का विवाह रत्नावली से हुआ था। जिनके रूप पर यह अत्यधिक आसक्त थे। पत्नी की एक व्यंग्य से आहत होकर यह सन्यासी हो जाते हैं और काशी आ जाते हैं लगभग 20 वर्षों तक इन्होंने समस्त भारत का भ्रमण करते हैं और यह काशी, अयोध्या ,कभी चित्रकूट और कभी काशी में निवास करते हैं।  काशी में ही 1623 ईसवी. अस्सी घाट पर ...